बुधवार, 2 सितंबर 2009

स्वागत हैं आप का

दोस्तों आप सभी का स्वागत करते हुए मुझे काफी खुशी हो रही हैं। ब्लॉग एक माध्यम हैं ऐसे लोगों से जुड़ने का जिनके साथ रूबरू होने के अलावा उन लोगों से मिलने का अनुभव होता जिनसे हम सीधे तौर पे जुड़े नही। कई दिनों से ये चाहत थी की अपना भी एक ब्लॉग हो, जैसे लोगों की एक इच्छा होती है की अपना भी एक घर हो। कुछ दिनों पहले मुंबई में प्रोफ़ेसर अनीता जी के सेमिनार में शामिल कोने का अनुभव हां। उस वक्त मुझे भी लगा के अपना वो पुराना ब्लॉग वाला सपना पुरा करने का वोह वक्त आ गया है। पत्रकारिता के इस भीड़ और हर समय बिजी रहने की आदत ने मुझे वक्त ही नही मिला था लेकिन अब कुछ वक्त जरूर मिला और मैं ये ब्लॉग लिखने के लिए तैयार हो गया।

हाँ तो मैं बता रहा था के उस सेमिनार में मुझे काफी पिछडेपन का अहसास हो रहा था, अपना ब्लॉग बनने के लिए। अनिताजी भी मुजे बहूत बार कहा था के मैं अपना ब्लॉग शुरू करूँ। ब्लॉग के जरिये अपने दिल की बात कह सकूं। वैसे भी पत्रकार हर रोज लिखते रहते हैं लेकिन अपने पेपर के लिए। उसमे लोगों को क्या चाहिए उस हिसाब से ही लिख सकते हैं। उसमे अपने बारे में नही बता सकते। सो ये अच्छा जरिए हैं अपनी दिल की बात कही कही जाए।

इस ब्लॉग पे आने के बाद आशा हैं के बहूत ऐसे लोगों से मिल लूँ जो इस ब्लॉग के बारे में गुरु बन सकते हैं और हमें और मदद मिल सकती हैं। पहली बार लिख रहा हूँ तो बहूत कुछ कहने की ईच्छा हो रही हैं। लेकिन सोचता हूँ कुछ देर के लिए रुक जाऊं और अपने काम पुरे होने के बाद इसमे जी जान से जुट जाऊं। आशा हैं आप इसमे मुजे और मदद दे उसके साथ मेरी हौसला अफजाई करें।

धन्यवाद् और शुक्रिया.

1 टिप्पणी:

  1. स्वागत है, ये जान कर और भी अच्छा लग रहा है कि आप ने अभिव्यक्ति का माध्यम हिन्दी चुना है जब की आप मराठी में भी ब्लोग बना सकते थे। आशा करती हूँ कि आप जल्द तीनों भाषाओं में अपने ब्लोग बनायेगें। जिस सेमिनार की आप बात कर रहे हैं उसमें आप की मदद का बहुत बड़ा हाथ था और उसके लिए मैं सदा आप की ॠणी रहूँगी।

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