जब सुबह उठती हूँ
सामने तुझको देखती हूँ .
रात भर मैंने जो सपने संजोये थे
मेहंदी भरे हाथों को सामने रखकर,
बहुत खुश हूँ उन्हें तुम्हारे
नजर से सच होते हुए देखकर.
सँवरते हुए बालोंको लेकर
अपने आप से उलझ जाती हूँ मैं,
छुते हो गेसुए बदन को तो
आँख चुराते शरमा सी जाती हूँ मैं.
तुम्हारी बाँहों में सुकून सा लगता हैं
आगोश में लेते हो जब तुम मुझे,
बाँवरे बालम तुझपे जान लुटा दूं मैं,
आँचल हटा कर देख लेते हो जब तुम मुझे.
मंगलवार, 28 सितंबर 2010
सोमवार, 27 सितंबर 2010
दर्द का चेहरा
दर्द का चेहरा कैसे दिखता हैं.
मुरजाता या खुद पे इतराता.
कईयों में बस जाता हैं ये
कईयों को बेबस करता हैं ये.
इसका वजूद चेहरे पे दिखता हैं
दूर जाते हुए निशान छोड़ जाता हैं.
ये अपनासा भी लगता हैं
इससे बचाना सा भी लगता हैं.
इसके चेहरे के पीछे छुपा राज हैं
भेड़ियों की जमात का ये सरताज हैं .
मुरजाता या खुद पे इतराता.
कईयों में बस जाता हैं ये
कईयों को बेबस करता हैं ये.
इसका वजूद चेहरे पे दिखता हैं
दूर जाते हुए निशान छोड़ जाता हैं.
ये अपनासा भी लगता हैं
इससे बचाना सा भी लगता हैं.
इसके चेहरे के पीछे छुपा राज हैं
भेड़ियों की जमात का ये सरताज हैं .
रविवार, 26 सितंबर 2010
पेड़
ये हराभरा पेड़ यूँ ही कायम रहें
जीने के अंदाज़ यूँ ही कायम रहें.
पत्तों का हरापन ऐसे लगता हैं,
जैसे वतन लौट आया हुआ परदेसी.
शाखाओंका लचकना ऐसे
के मानो लड़की अल्हड सी.
फलों की बात ही कुछ और हो
जवानी का जोर कुछ और हो.
आज फूलों को भी उछलना सा लगता हैं
तितलियों की तरह उड़नासा लगता हैं.
यादे भी बिकुल पेड़ जैसी हैं
बढती हैं जैसे तरोताजा हो.
हवाओं की महक मानो
चन्दन जैसी लगती हो.
जीने के अंदाज़ यूँ ही कायम रहें.
पत्तों का हरापन ऐसे लगता हैं,
जैसे वतन लौट आया हुआ परदेसी.
शाखाओंका लचकना ऐसे
के मानो लड़की अल्हड सी.
फलों की बात ही कुछ और हो
जवानी का जोर कुछ और हो.
आज फूलों को भी उछलना सा लगता हैं
तितलियों की तरह उड़नासा लगता हैं.
यादे भी बिकुल पेड़ जैसी हैं
बढती हैं जैसे तरोताजा हो.
हवाओं की महक मानो
चन्दन जैसी लगती हो.
शनिवार, 25 सितंबर 2010
माँ
दुनिया की हर चीज प्यार बिना अधूरी हैं
बुलंदी की हर ख़ुशी माँ बिना अधूरी हैं.
हर एक कदम, हर एक सांस
जिन्दा होने का अहसास दिलाती है,
माँ की एक छोटीसी बात भी
कमजोरों में जान फूंक देती हैं.
माँ ने एक नजर देखा भी तो
सारे गम मिट जाते हैं ,
माँ ने फेरा हाथ सरपे तो
सारे जख्मों पे मरहम लग जाते हैं .
कभी भूकी कभी प्यासी रहके
उसने हमें संभाला हैं,
कभी चुपके कभी मुस्कुराके
माँ ने हमको पाला हैं.
अगर माँ न होती तो मैं भी न होता
आज मै भी उसके लिए बच्चा हूँ ,
जिन्दगी के कसौटी पे
उसीके सहारे मैं खड़ा सच्चा हूँ .
बुलंदी की हर ख़ुशी माँ बिना अधूरी हैं.
हर एक कदम, हर एक सांस
जिन्दा होने का अहसास दिलाती है,
माँ की एक छोटीसी बात भी
कमजोरों में जान फूंक देती हैं.
माँ ने एक नजर देखा भी तो
सारे गम मिट जाते हैं ,
माँ ने फेरा हाथ सरपे तो
सारे जख्मों पे मरहम लग जाते हैं .
कभी भूकी कभी प्यासी रहके
उसने हमें संभाला हैं,
कभी चुपके कभी मुस्कुराके
माँ ने हमको पाला हैं.
अगर माँ न होती तो मैं भी न होता
आज मै भी उसके लिए बच्चा हूँ ,
जिन्दगी के कसौटी पे
उसीके सहारे मैं खड़ा सच्चा हूँ .
शुक्रवार, 24 सितंबर 2010
बादल
बदली हुयी रुतों के साथ
सतरंगी बादल दिखतें है
कुछ काले बादल
अनगिनत दुखों के
कुछ छटे बादल
रुकी हुयी जिन्दगी के.
बादल जो गरजते हैं
माँ से बिछड़ते हुए बच्चों की तरह,
बादल जो साफ़ हैं
दीखते हैं आईने की तरह.
उजले, नीले, गहरे न जाने कितने
बादलों के रूप नजर आते है
धुंदलाये हुए फिजाओं के तरह
जीवन को दर्शाते है.
सतरंगी बादल दिखतें है
कुछ काले बादल
अनगिनत दुखों के
कुछ छटे बादल
रुकी हुयी जिन्दगी के.
बादल जो गरजते हैं
माँ से बिछड़ते हुए बच्चों की तरह,
बादल जो साफ़ हैं
दीखते हैं आईने की तरह.
उजले, नीले, गहरे न जाने कितने
बादलों के रूप नजर आते है
धुंदलाये हुए फिजाओं के तरह
जीवन को दर्शाते है.
बुधवार, 16 सितंबर 2009
आख़िर हम भी तो इन्सान हैं
सांसद जयाप्रदाजी कुछ दिनों पहले अपने संसदीय क्षेत्र में बाढ़ से प्रभावित इलाकोंका दौरा करने निकली। पानी से निकलते हुए उन्हें डर लगा और वो डर के मारे रो पड़ी ऐसा हमने सुना और पढ़ा, ख़बर सुनके बड़ा दुःख और हसीं भी आई। दुःख इस बात का हुआ के देखो जयाप्रदाजी जैसे सांसद अपने क्षेत्र के लिए इतना कुछ करती हैं फिरभी कुछ लोग उन्हें भला बुरा कहने पे तुले हुए हैं। खैर छोड़ो हसीं इस बात की आई के जब उन्हें पानी से डर लगा तो वो रो पड़ी और उनके साथ जो लोग थे उन्हों ने उन्हें संभाला। क्या जमाना आ गया हैं नेताओंको उनके समर्थक अब संभाल रहें हैं।
लेकिन फ़िर भी जयाप्रदाजी को मानना पड़ेगा के उनका काम काबिले तारीफ हैं। पहले भी लोग बाढ़ पीडितों के लिए आगे आते थे। इंदिराजी एक बार हाथी पे बैठ के ऐसे इलाकों में गई भी थी। लेकिन आज के दौर में जब हर साधन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं फ़िर भी लोगों के प्रति आस्थाएँ कम नही हुई। पानी से बैर नही अच्छा ये तो हमने सुना भी हैं, जिनका पानी से तभी सम्बन्ध आता हैं, जो केवल अपने घर के तालाब में नहाते हैं, वे लोगों की आपबीती सुनते हैं ये अच्छा हैं।
डर किसको नही लगता सभी को लगता हैं। कुछ लोग बातें तो बड़ी बड़ी करते हैं लेकिन जब कठिन समय आता हैं तो घर में छुप जाते हैं ये भी हमने देखा हैं। हर व्यक्ति कभी न कभी डरा तो होगा, लेकिन हमें जयाजी को कुछ कहने से पहले आपने आप में भी झांकना होगा के शीशे के घर में रहकर हम उनपे पत्थर नही मार सकते क्यों के हम भी किसी वक्त डर गए होंगे। हम गाँधी जी नही हैं जो बिना डरे नौखाली के लोगों के बिच बिना डरे गए। चलो हम सभी एक नाव के माझी हैं।
लेकिन फ़िर भी जयाप्रदाजी को मानना पड़ेगा के उनका काम काबिले तारीफ हैं। पहले भी लोग बाढ़ पीडितों के लिए आगे आते थे। इंदिराजी एक बार हाथी पे बैठ के ऐसे इलाकों में गई भी थी। लेकिन आज के दौर में जब हर साधन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं फ़िर भी लोगों के प्रति आस्थाएँ कम नही हुई। पानी से बैर नही अच्छा ये तो हमने सुना भी हैं, जिनका पानी से तभी सम्बन्ध आता हैं, जो केवल अपने घर के तालाब में नहाते हैं, वे लोगों की आपबीती सुनते हैं ये अच्छा हैं।
डर किसको नही लगता सभी को लगता हैं। कुछ लोग बातें तो बड़ी बड़ी करते हैं लेकिन जब कठिन समय आता हैं तो घर में छुप जाते हैं ये भी हमने देखा हैं। हर व्यक्ति कभी न कभी डरा तो होगा, लेकिन हमें जयाजी को कुछ कहने से पहले आपने आप में भी झांकना होगा के शीशे के घर में रहकर हम उनपे पत्थर नही मार सकते क्यों के हम भी किसी वक्त डर गए होंगे। हम गाँधी जी नही हैं जो बिना डरे नौखाली के लोगों के बिच बिना डरे गए। चलो हम सभी एक नाव के माझी हैं।
मंगलवार, 8 सितंबर 2009
बिग बॉस
सुना हैं बिग बी यानी अपने अमिताभ बच्चन अब बिग बॉस में आ रहें हैं। वैसे हमें पहले ये तो पता नही था के ये बिग बॉस चीज है क्या। बिग बॉस का हमें पहले यही मालूम था के कुछ गिने चुने लोगों को किसी अनजान जगह पे रखा जाता हैं, फ़िर उनके हर एक मूवमेंट पे नजर रखी जाती हैं। उनकी विल पॉवर देखी जाती हैं। हाँ जैसे पहले कुछ एपिसोड में राखी सावंत, राहुल महाजन, मोनिका बेदी, राजा जैसे नामी हस्तियाँ थी। जिन्हें देखने के लिए लोग इडीयट बॉक्स के सामने बैठे रहते थे। हमें इसमे हिस्सा न लेने में कामयाब हुए कुछ लोगों के इंटर view भी देखना पड़े जैसे संजय निरुपम, रामदास आठवले जैसे लोग भी शामिल हैं।
लेकिन हमें ये समझ में नही आ रहा हैं के बिग बॉस में बिग बी क्या क्या काम मेरा मतलब हैं क्या रोल हैं। बिग बॉस में एक ऐसी व्यक्ति की आवाज आती रहती हैं जो परदे के पीछे से आती हैं। वो आवाज कुछ लगभग अमिताभ बच्चन जैसी थी लेकिन अब परदे पे सच में अमिताभ आ रहें हैं तो लोगों के उत्सुकता और बढ़ी होगी।
कुछ दिनों पहले हमने एक सेमिनार में टीवी मीडिया के लोगों को कहते हुए देखा था के टीआरपी के हिसाब से उनको ad मिलती हैं। और जिसका टीआरपी ज्यादा उस चैनल को लोग ज्यादा पसंद करते हैं। तो लोगों को बने रहने के लिए ऐसे शोव्स होना लाजमी हैं। पिचले कुछ दिनों पहले राखी सावंत का स्वयंवर आया था एक चैनल पे लोग चैनल पे नज़ारे जमा के बैठे थे की कौन होगा राखी का न होने वाला पति। बाद में पता चला की राखी को वो पति नसीब हो न हो उस चैनल का टीआरपी बढ़ा। अब लगता हैं कुछ इस टीआरपी बढ़ने के चक्कर में बिग बॉस में बिग बी आ रहे हैं। चलो उन लोगों को जिनको कुछ एक लोगों के हिसाब में कुछ काम नही ऐसे लोगों को देखने के लिए एक और शो आया। लगे रहो बिग बी.
लेकिन हमें ये समझ में नही आ रहा हैं के बिग बॉस में बिग बी क्या क्या काम मेरा मतलब हैं क्या रोल हैं। बिग बॉस में एक ऐसी व्यक्ति की आवाज आती रहती हैं जो परदे के पीछे से आती हैं। वो आवाज कुछ लगभग अमिताभ बच्चन जैसी थी लेकिन अब परदे पे सच में अमिताभ आ रहें हैं तो लोगों के उत्सुकता और बढ़ी होगी।
कुछ दिनों पहले हमने एक सेमिनार में टीवी मीडिया के लोगों को कहते हुए देखा था के टीआरपी के हिसाब से उनको ad मिलती हैं। और जिसका टीआरपी ज्यादा उस चैनल को लोग ज्यादा पसंद करते हैं। तो लोगों को बने रहने के लिए ऐसे शोव्स होना लाजमी हैं। पिचले कुछ दिनों पहले राखी सावंत का स्वयंवर आया था एक चैनल पे लोग चैनल पे नज़ारे जमा के बैठे थे की कौन होगा राखी का न होने वाला पति। बाद में पता चला की राखी को वो पति नसीब हो न हो उस चैनल का टीआरपी बढ़ा। अब लगता हैं कुछ इस टीआरपी बढ़ने के चक्कर में बिग बॉस में बिग बी आ रहे हैं। चलो उन लोगों को जिनको कुछ एक लोगों के हिसाब में कुछ काम नही ऐसे लोगों को देखने के लिए एक और शो आया। लगे रहो बिग बी.
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